आर्थिक सुस्ती भगाने मे जुटा चीन

चिकन, फ्राइड राइस बेचकर आर्थिक सुस्ती भगाने में जुटा चीन

ट्रेड वॉर से चीन की हालत खराब हो चुकी है। देश के निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालात यह है कि अब उसे रोजगारों का सृजन करने और खपत बढ़ाने के लिए अनूठे तरीकों को अपना रहा है। न सिर्फ लोगों को ढाई दिनों की छुट्टी दी जा रही है, बल्कि रेस्तरांओं व मॉल को भी देर तक खुला रखने को कहा जा रहा है।

अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर की वजह से चीन को आर्थिक मोर्चे पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। चीन की अर्थव्यवस्था साल 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद सबसे बुरे दौर में है। अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कम्युनिस्ट देश विभिन्न तरह के अनूठे तरीके अपना रहा है, जिसमें रेस्तरांओं को ज्यादा से ज्यादा वक्त तक खुला रखने की तरकीब भी अपनाई जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लजीज फ्राइड राइस और चिकन का लुत्फ उठाएं और अर्थव्यवस्था सुस्ती से उबरे।

हांगकांग की सीमा पर स्थित गुआंगडोंग सबसे बड़ी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था है, जो अपने यहां के मशहूर चिकन और फ्राइड राइस जैसे पकवानों का फायदा उठाते हुए भारी तादाद में शेफ को प्रशिक्षण देगा और 2022 तक इससे जुड़े तीन लाख रोजगारों का सृजन करेगा। रोजगार को बढ़ावा देने के लिए यह 20.8 अरब युआन (3.1 अरब डॉलर) वाली प्रोविंशियल पैकेज का हिस्सा है, जिसमें सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन रेट्स में कटौती, छोटे कारोबारियों को सब्सिडी प्रदान करना और स्टार्ट-अप को सीड फंडिंग देना शामिल है।

वहीं, बीजिंग दुकानों व मॉल को देर रात तक खुला रखने का आग्रह कर रहा है और औद्योगिक हेबेई प्रांत लोगों को खर्च करने के लिए अधिक से अधिक वक्त देने के लिए 2.5 दिनों की छुट्टी देने की पेशकश कर रहा है

केंद्र सरकार भी इस मुहिम में शामिल है। सालाना स्पोटर्स कंजम्पशन को 2020 तक 1.5 लाख करोड़ युआन करने के उद्देश्य से सरकार न सिर्फ टैक्स कट कर रही है, बल्कि वाटर स्पोटर्स, स्कीइंग, आउटडोर एक्टिविटीज और मैराथन को बढ़ावा भी दे रही है। इस सिलसिले में इस सप्ताह दो साल के लिए ब्लू प्रिंट जारी किया गया है।

चीन के नीति नियंताओं ने इस पहले अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती से निपटने के लिए खपत में बढ़ोतरी और रोजगार सृजन के ठोस उपायों का सहारा ले चुकी है। इस बार रिटेल सेल्स ग्रोथ और श्रम बाजार में तनाव ज्यादा दिख रहा है, जिससे व्यापक सुस्ती का अंदेशा है। एपल इंक से लेकर फोक्सवैगन एजी जैसी वैश्विक कंपनियां इस असर को महसूस कर रही हैं।

चीन का निर्यात दिसंबर महीने में भारी गिरावट के साथ 221.25 अरब डॉलर पर आ गया। यह दिसंबर, 2017 की तुलना में 4.4 प्रतिशत की गिरावट है। नवंबर, 2018 की तुलना में दिसंबर में चीन का निर्यात 1.4 प्रतिशत घटा है। यह अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध के बीच पिछले दो साल में चीन के निर्यात में सबसे बड़ी गिरावट है। इससे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में लगातार जारी सुस्ती का संकेत मिलता है।

चीन के सीमा शुल्क विभाग (सीएसी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर, 2018 में निर्यात और आयात दोनों मोर्चों पर चीन का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था पर जो नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, वह चीन के अधिकारियों द्वारा पूर्व में लगाए गए अनुमान से भी अधिक है।

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